राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार, 24 अगस्त को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे। उनका यह दौरा भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) के बीच सीमा विवाद पर होने वाली 25वें दौर की बातचीत से पहले हो रहा है। डोभाल मंगलवार, 25 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी से मुलाकात करेंगे।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अगले महीने 12 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की उम्मीद है। ऐसे में डोभाल की चीन यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंधों की समीक्षा और आगे की बातचीत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वांग यी के साथ सीमा विवाद पर होगी चर्चा
विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, अजीत डोभाल चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक करेंगे। वांग यी भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि के तौर पर डोभाल के चीनी समकक्ष हैं। डोभाल चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात कर सकते हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर विस्तार से चर्चा होगी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का मुख्य माध्यम है। इसके अलावा, यह आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण मंच भी है।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त 2025 में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का 24वां दौर हुआ था। उस दौरान दोनों पक्षों ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की थी और कई मुद्दों पर साझा समझ बनाने की कोशिश की थी।
इस बार की बातचीत में दोनों देश सीमा से जुड़े मुद्दों पर आगे चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर भी जोर दिया जाएगा।
द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी होगी बातचीत
विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
डोभाल की चीन यात्रा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन होने वाला है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने से पहले दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत से आपसी संबंधों की स्थिति की समीक्षा का मौका मिलेगा।
अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से भारत और चीन के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। ऐसे में सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में आगे की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
LAC पर भी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में भारत और चीन के अधिकारियों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति को लेकर भी बातचीत हुई थी। यह बैठक सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने कार्य तंत्र यानी WMCC के तहत हुई थी।
इस बैठक में सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, दोनों देशों के बीच बनाए गए तंत्र और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
अगस्त 2025 में हुई विशेष प्रतिनिधियों की पिछली बैठक के दौरान भारत और चीन ने WMCC के तहत एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर भी सहमति जताई थी। इस समूह का उद्देश्य भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में सीमा निर्धारण से जुड़े मामलों में शुरुआती स्तर पर समाधान की संभावनाओं का पता लगाना था।
भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश सीमा विवाद के साथ-साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। मंगलवार को होने वाली डोभाल और वांग यी की बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर भी नजर रहेगी।
